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30 September 2020

बाबरी विध्वंस मामले में सभी आरोपी सीबीआई कोर्ट से बरी

बाबरी विध्वंस आरोपी बरी

लखनऊ: बाबरी विध्वंस केस में बुधवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. सभी 32 आरोपियों को कोर्ट ने बरी किया. किसी को भी विध्वंस के षड्यंत्र में शामिल होना नहीं पाया. फैसले के बाद भाजपा में खुशी की लहर है. केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) की विशेष अदालत द्वारा फैसला सुनाया गया. मामले की अलग-अलग जिलों में सुनवाई हुई, बाद में 1993 में हाईकोर्ट के आदेश पर लखनऊ में विशेष अदालत गठित हुई थी और केस सीबीआई को सौंप दिया गया था.

भाजपा के कुछ बड़े नेता कोरोना वायरस महामारी के चलते फैसला सुनने कोर्ट में नहीं पहुंचें. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एस के यादव ने सभी आरोपियों को कोर्ट में तलब किया था. अयोध्या, बाबरी मस्जिद और राम मंदिर निर्माण का मुद्दा हमेशा से देश की राजनीति में चर्चा का केंद्र रहा है.

अयोध्या विध्वंस केस में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण अडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, विनय कटियार, महंत नृत्य गोपाल दास, उमा भारती, महंत धर्मदास, डॉ. रामविलास वेदांती, चंपत राय, सतीश प्रधान, साध्वी ऋतंभरा, पवन कुमार पांडे, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडे, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, महाराज स्वामी साक्षी, विनय कुमार राय, नवीन शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धर्मेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ और धर्मेंद्र सिंह गुर्जर आरोपी थे.

अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे को ढहा दिया गया था. 28 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद ये फैसला आया है. फैसले को लेकर रामनगरी की सुरक्षा कड़ी की गई है. अयोध्या में लोगों ने फैसले का स्वागत किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने फैसले का स्वागत किया.

इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बाबरी विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के फैसले पर बुधवार को सवाल उठाए और केंद्रीय जांच एजेंसी से इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अनुरोध किया. कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 2019 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मुताबिक बाबरी मस्जिद को गिराया जाना एक गैरकानूनी अपराध था लेकिन विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. विशेष अदालत का निर्णय साफ तौर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रतिकूल है. असदुद्दीन ओवैसी ने इसे अदालत की तारीख का काला दिन करार दिया है.

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