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28 August 2022

चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया, उदय उमेश ललित शपथ समारोह

CJI ललित शपथ समारोह

नई दिल्ली: जस्टिस उदय उमेश ललित शनिवार को देश के मुख्य न्यायाधीश बने. राष्ट्रपति भवन में उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई. उन्होंने जस्टिस एनवी रमना की जगह ली है जो कि कल 26 अगस्त को रिटायर हुए हैं. देश के 49वें चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली है. भारतीय न्यायपालिका के छठे ऐसे प्रमुख, जिनका कार्यकाल 100 दिनों से कम है. उनका कार्यकाल 74 दिनों का होंगा. वह 8 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु होने पर सेवानिवृत्त होते हैं.

जस्टिस उदय उमेश ललित क्रिमिनल लॉ के स्पेशलिस्ट माने जाते हैं. जस्टिस ललित का जन्म 9 नवंबर 1957 को महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ था. उन्हें 13 अगस्त 2014 को सीधे बार से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया था. इसके बाद उन्हें मई 2021 में राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया. वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत सभी 2G मामलों में CBI के पब्लिक प्रोसिक्यूटर के रूप में ट्रायल्स में हिस्सा ले चुके हैं. वे दो कार्यकालों के लिए सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विस कमेटी के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं. उनके पिता बॉम्बे हाईकोर्ट के जज रह चुके हैं. दादा रंगनाथ ललित एक जाने-माने वकील रहे हैं. जस्टिस यूयू ललित अपने परिवार में तीसरी पीढ़ी के वकील रहे. उनकी बेटे श्रेयश ललित की पत्नी रवीना भी वकील हैं.

जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि वह मुख्य न्यायाधीश के अपने 74 दिनों के कार्यकाल के दौरान तीन क्षेत्रों पर काम करने की इच्छा रखते हैं. उन्होंने कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे कि सुप्रीम कोर्ट में कम से कम 1 संविधान पीठ साल भर काम करे. साथ ही शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए मामलों को सूचीबद्ध करना और जरूरी मामलों को मेंशन करना उनकी प्राथमिकता में से एक रहेगा. वे सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों का हिस्सा रहे हैं. 3 तलाक को असंवेधानिक करार देने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के भी सदस्य थे. उनकी अध्यक्षता वाली एक पीठ ने त्रावणकोर के तत्कालीन शाही परिवार को केरल के ऐतिहासिक श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन करने का अधिकार दिया था. स्किन टू स्किन टच पर फैसला दिया था. भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या को अदालत की अवमानना के आरोप में 4 महीने के कारावास और 2000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी.

सीजेआई ललित के शपथ समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्री समारोह का हिस्सा बने. न्यायमूर्ति ललित से पहले प्रधान न्यायाशीध के रूप में सेवाएं देने वाले न्यायमूर्ति एन वी रमना भी इस मौके पर मौजूद थे.

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