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25 July 2022

द्रोपदी मुर्मू शपथ ग्रहण समारोह, भारत 15वीं राष्ट्रपति बनी

मुर्मू शपथ 15वीं राष्ट्रपति

नई दिल्ली: देश को पहली महिला आदिवासी राष्ट्रपति मिली. एनडीए की विजयी उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को शपथ ग्रहण की. इंटर सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. वहीं फिर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 21 तोपों की सलामी दी गई, संसद भवन के सेंट्रल हॉल में पदभार ग्रहण किया. इससे पहले द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन पहुंचकर यहां रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी से मुलाकात की. देश की 15वीं राष्ट्रपति आजाद भारत में जन्मी, भारतीय इतिहास की सबसे युवा प्रेसिडेंट है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमणा ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के बाद उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने उसका कुछ अंश अंग्रेजी में पढ़ा. राष्ट्रगान के साथ शपथ ग्रहण समारोह का समापन हुआ.

द्रोपदी मुर्मू ने शपथ ली कहा अगले 25 वर्षों के विजन की जिम्मेदारी मिलना सौभाग्य है. गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी मुझे अपने प्रतिबिंब के रूप में देख सकते हैं. लोकतंत्र की ताकत ने मुझे यहां तक पहुंचाया. द्रौपदी मुर्मू ने जनता का अभिनंदन किया.

मुर्मू ने 18 जुलाई को हुई वोटिंग में विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराया था. काउंटिंग 21 जुलाई को हुई थी. मुर्मू के लिए विपक्षी खेमे के 125 विधायकों और 17 सांसदों ने क्रॉस वोटिंग की थी.

मुर्मू ओडिशा की रहने वाली हैं. वे इससे पहले झारखंड की राज्यपाल भी रही हैं. शिक्षक से राष्ट्रपति पद तक का सफर तय किया. कभी शिक्षक रहीं मुर्मू इलाके के विधायक के कहने पर राजानीति में आईं. 1997 में पहला चुनाव पार्षद का लड़ा और जीतीं और यहीं से उनका राजनैतिक सफर शुरू हुआ. जिला परिषद की उपाध्यक्ष भी चुनी गईं. वर्ष 2000 में राइरांगपुर विधानसभा से विधायक चुने जाने के बाद उन्हें बीजद और भाजपा गठबंधन वाली सरकार में स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री बनाया गया. 2002 में मुर्मू को ओडिशा सरकार में मत्स्य एवं पशुपालन विभाग का राज्यमंत्री बनाया गया. 2006 में उन्हें भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. 2009 में वह राइरांगपुर विधानसभा से दूसरी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतीं. इसके बाद वह लोकसभा चुनाव भी लड़ीं, लेकिन जीत नहीं पाईं. 2015 में द्रौपदी को झारखंड का राज्यपाल बनाया गया. 2021 तक उन्होंने राज्यपाल के तौर पर अपनी सेवाएं दीं. अब वह देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बन गईं हैं.

आदिवासी परिवार में जन्म द्रौपदी का जन्म ओडिशा के मयूरगंज जिले के बैदपोसी गांव में 20 जून 1958 को हुआ था. द्रौपदी संथाल आदिवासी जातीय समूह से संबंध रखती हैं. द्रौपदी की शादी श्यामाचरण मुर्मू से हुई. उनसे दो बेटे और दो बेटी हुई. साल 1984 में एक बेटी की मौत हो गई. 25 साल के बेटे लक्ष्मण मुर्मू की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई. 2013 में द्रौपदी के दूसरे बेटे की मौत हो गई. दो बेटों की मौत का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था कि 2014 में द्रौपदी के पति श्यामाचरण मुर्मू की भी मौत हो गई. अब द्रौपदी के परिवार में केवल बेटी इतिश्री मुर्मू हैं. इतिश्री बैंक में नौकरी करती हैं. सदमो से उबरने के लिए उन्होंने अध्यात्म का सहारा लिया. द्रौपदी राजस्थान के माउंट आबू स्थित ब्रह्कुमारी संस्थान में जाने लगीं. यहां कई-कई दिन तक वह ध्यान करतीं. तनाव को दूर करने के लिए राजयोग सीखा. संस्थान के अनेक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगीं.

द्रौपदी का बचपन बेहद अभावों और गरीबी में बीता था. लेकिन अपनी स्थिति को उन्होंने अपनी मेहनत के आड़े नहीं आने दिया. मुर्मू की स्कूली पढ़ाई गांव में हुई. साल 1969 से 1973 तक वह आदिवासी आवासीय विद्यालय में पढ़ीं. उन्होंने भुवनेश्वर के रमादेवी विमेंस कॉलेज से स्नातक तक की पढ़ाई पूरी की. 1979 से 1983 तक सिंचाई और बिजली विभाग में जूनियर असिस्टेंट के रूप में भी कार्य किया. इसके बाद 1994 से 1997 तक उन्होंने ऑनरेरी असिस्टेंट टीचर के रूप में कार्य किया था. बेटी को पढ़ाने के लिए द्रौपदी मुर्मू शिक्षक बन गईं.

भारत में 25 जुलाई को ही राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजित होता है. भारत में इमरजेंसी के बाद से आज तक सभी राष्ट्रपतियों का शपथ ग्रहण समारोह 25 जुलाई को ही आयोजन किया जाता है. साल 1977 से 25 जुलाई को ही देश के राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण समारोह होता है. 1977 से अब तक 9 राष्ट्रपतियों ने 25 जुलाई को शपथ ग्रहण की है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की दिनचर्या. वे सुबह साढ़े तीन बजे उठती हैं. एक घंटे मॉर्निंग वॉक और योग करती हैं. फिर खुद से मंदिर साफ करती हैं. मंदिर को पानी से धोती हैं और पूजा करती हैं. करीब एक घंटे तक रोज ध्यान लगाती हैं. राष्ट्रपति मुर्मू भगवान शिव की भक्त हैं. वे ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुडी है. द्रौपदी के साथ शिव बाबा के ध्यान के लिए ट्रांसलाइट और एक छोटी सी पुस्तिका हमेशा रहती है. वह जहां-जहां रहने जाती हैं, वहां पूजा के लिए मंदिर जरूर बनाती हैं. जनता से सीधे संवाद करने की कोशिश करती हैं, ताकि आम लोगों की समस्याओं को दूर किया जा सके.

मुर्मू के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में उनके गृह राज्य ओडिशा से 64 खास मेहमान पहुंचे हैं. सभी मेहमानों के लिए लंच का इंतजाम राष्ट्रपति भवन में किया गया था. शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रीमंडल के कई सदस्य, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे. द्रौपदी मुर्मू ने महात्मा गांधी को उनके शपथ ग्रहण समारोह से पहले राजघाट पर श्रद्धांजलि अर्पित की. रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हुआ. 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू से पहले सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी(Neelam Sanjiva Reddy) रहे हैं, जिनकी राष्ट्रपति बनते समय उम्र 64 साल दो महीने थी.

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