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31 July 2017

सरदार सरोवर बांध विस्थापितो ने कोर्ट में दाखिल की याचिका

सरदार बांध विस्थापित कोर्ट याचिका

बडवानी: सरदार सरोवर बांध प्रोजक्ट के विस्थापितों का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. कोर्ट डूब क्षेत्र से विस्थापितों को जबरन हटाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. इस मामले की सुनवाई 8 अगस्त को तय हुई. चूंकि विस्थापितों के लिए डेडलाइन 31 जुलाई थी, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विस्थापितों को कोई राहत नहीं दी है. प्रशासन अगर चाहे तो उन्हें हटाने की कार्रवाई जारी रख सकता है. इसके बाद भी अब तक आधे से ज्यादा परिवार डूब गांवों में ही निवासरत हैं.

बांध की ऊंचाई बढ़ाने से मध्यप्रदेश के बड़वानी, खरगोन, अलिराजपुर और धार जिले के निवासी प्रभावित हो रहे है. अभी बांध की ऊंचाई करीब 122 मीटर है और इसे 128 मीटर तक ले जाया जाना है. डूब प्रभावित इलाको में बड़वानी, धार, खरगोन और अलीराजपुर के 178 गांवों शामिल है. प्रभावित चार जिलों में 65 गांव बड़वानी के, 77 गांव धार जिले के, 26 गांव आलीराजपुर के, 10 गांव खरगोन जिले के है. इस मामले में 40 हजार परिवार प्रभावित हो रहे हैं.

सोमवार को डूब प्रभावितों ने बड़वानी के राजघाट पुल पर और स्टेट हाइवे पर सुबह दो घंटे जाम लगाकर अपना विरोध जताया. डूब प्रभावितों का कहना है जब सरकार हमारी जल हत्या करने पर तुल ही गई है तो हमने भी अब कफन ओढ़ लिया है. चाहे जल समाधि लेना पड़े, लेकिन बिना संपूर्ण पुनर्वास के गांव खाली नहीं करेंगे. ज्यादातर घरों में चूल्हे नहीं जले. रविवार को डूब प्रभावितों ने कफन ओढ़कर सरकार को चुनौती दी. धार जिले के चिखल्दा में जल सत्याग्रह किया. चिखल्दा में ही नर्मदा बचाओ आंदोलन नेत्री मेधा पाटकर सहित 12 लोगों का अनिश्चितकालीन अनशन सोमवार को भी जारी रहा है. बड़वानी में सरदार सरोवर के डूब क्षेत्र में आ रहे गांधी स्मारक को हटाने पर भी हंगामा हुआ.

नर्मदा बचाओं आंदोलन की ओर से दाखिल याचिका में कहा कि इस मामले में 40 हजार परिवार प्रभावित हो रहे हैं. इसमें 192 गांव शामिल हैं. ज्यादार विस्थापितों को वैकल्पिक जगह नहीं मिली है और ऐसे में प्रशासन ने इन लोगों को टीन शेड में रख रहा है. कोर्ट में दाखिल याचिका में विस्थापितों को और अधिक समय की मांग की गई है. ताकि वे सही तरीके से दूसरी जगहों पर जा सकें.

प्रभावित विस्थापितों को कुल 18 महीने का वक्त दिए जाने का नियम बनाया गया था. जिसमें दूसरी जगह शिफ्ट होने के बाद पानी छोड़ने के लिए भी 6 महीने का वक्त दिये जाने के लिए कहा था ताकि लोग बचे हुए सामान को भी निकाल सकें. इस मामले में प्रशासन ने मुआवजा तो दिया लेकिन वक्त नहीं दिया. जिसकी वजह से लोग बेहतर वैकल्पिक जगह नहीं खोज पाए.

इससे पहले 8 फरवरी को सरदार सरोवर बांध प्रोजेक्ट के विस्थापितों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली थी. कोर्ट ने 681 विस्थापित परिवारों को 60 लाख प्रति 2 हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा देने के आदेश दिए थे.

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